Thursday, 12 September 2013
इज्जत का खयाल!
लड़की: अम्मी मैं शादी नहीं करुँगी
और अगर ज़बरदस्ती तुमने मेरी शादी की.. तो मैं घर से भाग जाउंगी..
माँ रोते हुए बोली, "बेटी मैंने भाग के तेरे अब्बा के साथ शादी की..
तेरी खाला और बहन ने भाग के शादी की..
तेरा भाई नौकरानी के साथ और तेरा चाचा धोबन के साथ भाग गया..
तेरी फूफू सब्जी वाले के साथ और तेरी मौसी की बेटी दूधवाले के साथ भाग गयी..
तेरा बाप दो बार पड़ोसन के साथ भाग चुका है..
और अब तू भी भाग जायेगी तो..
..

भाजपा नेता मुजफ्फरनगर जाने से रोके गए, सोनिया-राहुल जायेंगे
गाजियाबाद [दैनिक जागरण]। मुजफ्फरनगर जाने के लिए गाजियाबाद पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के चार विधायकों समेत अन्य कार्यकत्र्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जबकि पांच विधायक गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचकर भूमिगत हो गये हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र को भी पुलिस गाजियाबाद में रोकने में सफल हो गई।
भाजपा के प्रदेश के विधायक विभिन्न मार्गो से मुजफ्फरनगर जाने के लिए निकले। मुरादनगर थाने के सामने पुलिस ने शाहजहांपुर के विधायक सुरेश खन्ना, गौंडा के बावन सिंह, फैजाबाद के रामचंद्र यादव एवं इलाहाबाद के केशव चंद मोर्या समेत भाजपा के अन्य कार्यकत्र्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। इन सभी को पुलिस लाइन ले जाया गया है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के पांच विधायक गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद भूमिगत हो गये।
भाजपा विधायक सतीश महाना, रघुनंदन भदौरिया, सलील विष्णु, राधा मोहन दास अग्रवाल, निरंजन ज्योति, कृष्णा पासवान एवं कानपुर भाजपा के महामंत्री राकेश तिवारी आज सुबह कानपुर शताब्दी से गाजियाबाद पहुंचे। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुराने पुल पर खड़ी रही और महानगर भाजपा अध्यक्ष अशोक मोंगा व भाजयुमो के प्रदेश मंत्री इंद्र नागर विधायकों को लेकर नये पुल से निकल गये व भूमिगत हो गये। पुलिस सभी की तलाश कर रही है।
दूसरी तरफ पुलिस को झांसा देकर मुजफ्फरनगर जा रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक कलराज मिश्र को पुलिस ने एनएच 24 पर लालकुआं के पास गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ भाजपा के नोएडा विधायक डा. महेश शर्मा, क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष पवन गोयल समेत अन्य नेता है।
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आजम से आजिज सपा
नई दिल्ली, (जागरण ब्यूरो)। अखिलेश सरकार के मंत्री आजम खां पार्टी व सरकार से नाराज हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आजम खां की अखिलेश व पार्टी के बड़े नेताओं से दिलों की दूरियां बढ़ रही हैं। खास बात यह है कि सरकार और पार्टी भी इस बार इन दूरियों को कम करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। फिलहाल मंशा, आजम को उनके हाल पर ही छोड़े रखने की है। यही वजह है कि राज्य कैबिनेट की बैठक में आठ बार न जाने के बावजूद न तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने और न सपा के दूसरे नेताओं ने ही उन्हें मनाने का कोई प्रयास किया।
बताते हैं कि सपा अपनी तरफ से आजम को नाराज करने या मनाने की कोई पहल नहीं करना चाहती। अलबत्ता, उन्हें हर मौके पर उतनी तवज्जो मिलेगी, जिसके वह हकदार हैं। तय उन्हें करना है कि वह उसे कितना लेना चाहते हैं। मसलन, आगरा में बुधवार को सपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के मंच पर जो कुर्सियां लगी थीं, उसमें एक आजम खां के लिए थी। कार्यक्रम शुरू होने के कुछ समय पहले तक वह नहीं आए तो उस पर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन को बैठा दिया गया। संदेश साफ है कि किसी के इंतजार में पार्टी या सरकार कहीं रुकने वाली नहीं है। इतना ही नहीं, कार्यसमिति में तो नरेश अग्रवाल और अबू आसिम आजमी ने आजम का नाम लिए बिना ही पार्टी में उनकी कार्यशैली को लेकर परोक्ष रूप से सवाल भी उठा दिया।
उधर, आजम के करीबी सूत्रों का कहना है कि बतौर मंत्री वह अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन सरकार और पार्टी उनकी बात ही नहीं सुन रही है। संगठन में उनके लोगों को तरजीह नहीं दी गई। सरकार में अल्पसंख्यक निकायों में नियुक्तियों का मामला लटका है। आजम अपनी तरफ से कार्यवाही कर चुके हैं। लेकिन उनकी फाइलों को ऊपर से हरी झंडी नहीं मिल रही है। जबकि, प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे हो रहे हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री होने के कारण मुस्लिम समुदाय उनसे भी जवाब मांग रहा है। सरकार की असफलता पर उनके पास जवाब नहीं है। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि यही हालात रहे तो आजम खुद ही सपा को अलविदा कह सकते हैं।
आडवाणी नहीं मानते हैं तो भी मोदी!
नई दिल्ली। भाजपा में नरेंद्र मोदी के पीएम प्रत्याशी के ऐलान को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि भाजपा मोदी के नाम पर आडवाणी को भी दरकिनार करने से अब नहीं चूकेगी। लिहाजा यदि आडवाणी नहीं भी मानते हैं तो भी शुक्रवार को मोदी के नाम का एलान कर दिया जाएगा। इस बाबत राजनाथ ने सभी प्रदेश भाजपा दफ्तरों में पदाधिकारियों को शाम तीन से पांच बजे तक उपस्थित रहने को कहा है।
वहीं, शुक्रवार को संसदीय बोर्ड की होने वाली अहम बैठक में यदि मोदी के नाम का ऐलान किया जाता है तो लालकृष्ण आडवाणी इसमें जाकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। मोदी के नाम पर जहां एक ओर आडवाणी खिलाफ हैं वहीं सुषमा स्वराज और मुरली मनोहर जोशी भी उनके नाम के ऐलान के पक्ष में नहीं हैं।
The Lonely Feroze Gandhi!
नई दिल्ली। स्वतंत्रता सेनानी फिरोज गांधी का जन्म 12 सितंबर, 1912 को मुंबई में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जहांगीर एवं माता का नाम रतिमाई था। 1915 में वे अपनी मां के साथ इलाहाबाद आ गए। इस प्रकार उनकी आरंभिक शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई। इलाहाबाद उन दिनों स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों का केंद्र था।
युवा फिरोज गांधी भी इसके प्रभाव में आए और बाद में नेहरू परिवार से उनका संपर्क हुआ। उन्होंने 1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार को लेकर हुए आंदोलन में भाग लिया तथा 1930-1932 के आंदोलन में जेल की सजा काटी। फिरोज गांधी 1935 में आगे के अध्ययन के लिए लंदन गए और उन्होंने स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स' से अंतरराष्ट्रीय कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
फिरोज गांधी ने क्षय रोग से पीड़ित पंडित जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू की भारत और जर्मनी के चिकित्सालयों में बड़ी सेवा की। उसी समय उनका इंदिरा गांधी से संपर्क हुआ और मार्च, 1942 ई. में इलाहाबाद में दोनों का विवाह हुआ।
अगस्त, 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन' में फिरोज गांधी कुछ समय तक भूमिगत रहने के बाद गिरफ्तार कर लिए गए। रिहा होने के बाद 1946 में उन्होंने लखनऊ के दैनिक पत्र नेशनल हेराल्ड' के प्रबंध निदेशक का पद संभाला। 1952 के प्रथम आम चुनाव में वे लोकसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद उन्होंने लखनऊ छोड़ दिया। कुछ वर्ष वे और इंदिरा, नेहरू जी के साथ रहे। इंदिरा जी का अधिकांश समय प्रधानमंत्री पिता की देख-रेख में बीतता था।
1956 में फिरोज गांधी ने प्रधानमंत्री निवास में रहना छोड़ दिया और वे सांसद के साधारण मकान में अकेले ही रहने लगे। 1957 में वे पुन लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इस बार उन्होंने संसद में भ्रष्टाचार के कई मामले उठाए। इन्हीं के कारण वित्त मंत्री टी. टी. कृष्णमाचारी को अपने पद से हटना पड़ा। वे नेहरू परिवार से अपने संबंधों की परवाह किए बिना प्रधानमंत्री की कई नीतियों, विशेषकर औद्योगिक नीतियों की कटु आलोचना करते थे। वे बड़े लोकप्रिय सांसद थे, पर निजी जीवन में अंतिम वर्षो में बहुत एकाकी हो गए थे। उनके दोनों पुत्र राजीव गांधी और संजय गांधी भी अपनी मां के साथ प्रधानमंत्री निवास में ही रहते थे।
1960 में फिरोज गांधी को दिल का दौरा पड़ा। इंदिरा जी उस समय महिला सम्मेलन में भाग लेने के लिए केरल गई थीं। सूचना मिलते ही वे तुरंत दिल्ली आई और 8 सितंबर, 1960 को फिरोज गांधी का देहान्त हो गया।
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