Friday, 13 September 2013
कांग्रेस का दांव 'धर्मनिरपेक्षता'

भाजपा की ओर से नरेंद्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाने के ऐलान के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर वह कैसे उनकी काट ढूंढे।
कांग्रेस का पहला दांव धर्मनिरपेक्षता बनाम सांप्रदायिकता की बहस छेड़कर वोटों के धुव्रीकरण करने पर रहेगा। मोदी के ऐलान के साथ ही पार्टी ने इसकी शुरुआत भी कर दी है।
मुजफ्फरनगर दंगों के लिए कांग्रेस ने मोदी को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने कहा है कि अमित शाह को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाने के बाद ही तय हो गया था कि प्रदेश में दंगे होंगे।
दरअसल, मोदी के विकास पुरुष की छवि को टक्कर देना कांग्रेस के लिए मुश्किल चुनौती है। इसलिए धर्मनिरपेक्षता बनाम सांप्रदायिकता के नारे को ही बुलंद करने का ही कांग्रेस संकेत दे रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि अर्थव्यवस्था फिर पटरी पर आ रही है। औद्योगिक सूचकांक बढ़ा है। सरकार ने संसद के मानसून सत्र में खाद्य सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण, पेंशन, कंपनी बिल समेत कई बड़े कानून बनाकर जनता को तोहफा दिया है।
मगर बढ़ती महंगाई, बढ़ती मंदी और बढ़ते भ्रष्टाचार के मुद्दे पर रटे रटाए जवाब के अलावा पार्टी के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। ऐसे में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर दलों को इकट्ठा कर मोदी पर हमला करने की कांग्रेस की पहली कोशिश है।
साथ ही गुजरात दंगों के जिन्न को पार्टी दोबारा फिर से बाहर निकालने पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री के घर कांग्रेस कोर कमेटी की बैठकों से लेकर दस जनपथ तक कई तरह की रणनीतियों और योजनाओं पर विचारों की जद्दोजहद जारी है।
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हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर सहित उसके आसपास के जिलों में फैली सांप्रदायिक हिंसा पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
कोर्ट ने सरकार को दो माह की लंबी मोहलत देते घटना से संबंधित समस्त ब्यौरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। याचिका पर सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
रावेंद्र रजौरिया द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह और न्यायमूर्ति विक्रमनाथ की खंडपीठ ने कहा कि क्षेत्र में शांति कायम रखना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
महाधिवक्ता एसपी गुप्ता ने बताया कि दंगों की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित कर दिया गया है, जो दो माह में अपनी रिपोर्ट देगा। इस पर कोर्ट ने दो माह बाद आयोग की रिपोर्ट भी दाखिल करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों की पुलिस जांच करे तथा याची अगली तारीख पर यदि कोई अन्य तथ्य प्राप्त करता है तो उससे न्यायालय को अवगत कराए।
याचिका में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कैबिनेट मंत्री आजम खां को भी पक्षकार बनाया है हालांकि कोर्ट ने उनको नोटिस जारी नहीं किया है।
याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता अर्चना त्यागी ने कहा कि पुलिस की लापरवाही के कारण दंगा हुआ जिसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। जितनी भी हत्यायें हुई हैं उनकी प्राथमिकी तक नहीं दर्ज की गई। चार दिन तक जिले में कोई डीएम नहीं था।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी के अलावा मुजफ्फरनगर के डीएम और एसएसपी को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने सरकार को दो माह की लंबी मोहलत देते घटना से संबंधित समस्त ब्यौरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। याचिका पर सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
रावेंद्र रजौरिया द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह और न्यायमूर्ति विक्रमनाथ की खंडपीठ ने कहा कि क्षेत्र में शांति कायम रखना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
महाधिवक्ता एसपी गुप्ता ने बताया कि दंगों की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित कर दिया गया है, जो दो माह में अपनी रिपोर्ट देगा। इस पर कोर्ट ने दो माह बाद आयोग की रिपोर्ट भी दाखिल करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों की पुलिस जांच करे तथा याची अगली तारीख पर यदि कोई अन्य तथ्य प्राप्त करता है तो उससे न्यायालय को अवगत कराए।
याचिका में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कैबिनेट मंत्री आजम खां को भी पक्षकार बनाया है हालांकि कोर्ट ने उनको नोटिस जारी नहीं किया है।
याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता अर्चना त्यागी ने कहा कि पुलिस की लापरवाही के कारण दंगा हुआ जिसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। जितनी भी हत्यायें हुई हैं उनकी प्राथमिकी तक नहीं दर्ज की गई। चार दिन तक जिले में कोई डीएम नहीं था।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी के अलावा मुजफ्फरनगर के डीएम और एसएसपी को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जिनके दोस्त ऐसे हों उन्हें दुश्मनों की जरुरत नहीं होती
मुजफ्फरनगर हिंसा को लेकर सपा की सियासत में दरार आ गई है। चौतरफा हमले से घिरी पार्टी के नेता अब एक-दूसरे की घेरेबंदी में लग गए हैं।पूर्व सांसद अमीर आलम ने सपा महासचिव एवं राज्यमंत्री का दर्ज प्राप्त अनुराधा चौधरी और गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष पर लोगों को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन के नकारेपन की वजह से अल्पसंख्यकों पर कहर बरपा है। एक लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। डीजीपी और एडीजी को हटाने के साथ पूर्व डीएम के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
बिजनौर लोक सभा प्रत्याशी पूर्व सांसद अमीर आलम ने राज्यमंत्री चितरंजन स्वरूप, वीरेंद्र सिंह, सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, बेटे विधायक नवाजिश आलम और इलम सिंह की मौजूदगी में मीडिया के समक्ष यह आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि सरकारी मशीनरी के नकारेपन की वजह से जिले में कहर बरपा है। खुफिया तंत्र और प्रशासन द्वारा गलत रिपोर्ट दिए जाने से शासन गंभीरता नहीं दिखा पाया है।
पूर्व डीएम सुरेंद्र सिंह के साथ सपा महासचिव अनुराधा चौधरी और मुकेश चौधरी ने एक विशेष वर्ग के लोगों को उकसाने का काम किया है। कुटबी में जो जुल्म हुआ, उसमें मुकेश चौधरी के एक करीबी का हाथ रहा है।
उन्होंने सीबीआई जांच कराने की बात से इंकार करते हुए कहा कि अखिलेश यादव सरकार जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। पूर्व सांसद ने कहा कि यदि खालापार की सभा नहीं होती तो इस तरह की नौबत नहीं आती।
एसएसपी ने हमारी नहीं सुनी थी: मंत्री
राज्यमंत्री चितरंजन स्वरूप और वीरेंद्र सिंह ने कहा कि घटना से अगले दिन ही मलिकपुरा का भ्रमण करने के बाद डीएम और एसएसपी से ममेरे भाइयों के परिजनों के नाम निकालने के लिए कहा था। लेकिन एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने नहीं सुनी, जिस कारण यह स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि कुछ गांवों में हुई हिंसा को सांप्रदायिक रूप की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।
सिद्दीकी के खिलाफ भी कार्रवाई होगी
सपा नेताओं ने खालापार में सभा को लेकर विवादों से घिरे सपा के प्रदेश सचिव राशिद सिद्दीकी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि कार्रवाई के लिए प्रदेश अध्यक्ष को रिपोर्ट दी जा चुकी है।
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फांसी बोल तो दी पर…….
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| अदालत भवन |
नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने दामिनी गैंगरेप के दोषियों को फांसी की सजा सुना दी है। हालांकि इस पर तामील की लंबी कानूनी प्रक्रिया है। वैसे भी, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक देश की अदालतों ने 10 सालों में 1455 कैदियों को फांसी की सजा सुनाई है।
सजा ए मौत को लेकर भारत के विरोधाभासी रवैये के बीच अदालत के इस फैसले पर देश ही नहीं दुनियाभर की निगाहें लगी रहीं।
देश की अदालतों में हर साल औसतन 130 लोगों को फांसी की सजा सुनाई जाती है लेकिन बीते 17 साल में महज तीन लोगों को ही मौत की सूली पर चढ़ाया जा सका है। दोषी को सजा देने की लंबी प्रक्रिया के बावजूद बीते साल भारत ने मौत की सजा पर पाबंदी जुड़े संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए प्रस्ताव के मसौदे का विरोध किया था। इस प्रस्ताव में दुनिया में कहीं भी फांसी पर रोक की बात कही गई थी ताकि सजा ए मौत को खत्म किया जा सके। भारत ने कहा कि हर देश को अपनी कानून व्यवस्था तय करने का अधिकार है।
आडवाणी जी की चिट्ठी राजनाथ जी के नाम
प्रिय श्री राजनाथ सिंह जी,
आज दोपहर को जब आप मुझे आज के संसदीय अधिकरण के बैठक की सूचना देने आये थे तब मैंने अपने मन की व्यथा के बारे में और आपके कार्य संचालन के विषय में अपनी निराशा के बारे में कुछ कहा था।
मैंने आपको उस समय कहा था कि मैं विचार करूँगा कि बैठक में आकर अपनी बातें सभी सदस्यों को कहूँ अथवा नहीं। अब तय किया है कि आज के बैठक में न आऊं यही उचित होगा।
सादर,
आपका
(हस्ताक्षर)
लाल कृष्ण आडवाणी
युद्ध तो अमानवीय ही होते हैं
युद्ध तो सभी अमानवीय ही होते हैं लेकिन सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध ने क्रूरता की सभी हदें पार कर दी हैं। छिटपुट घटनाओं से शुरू हुआ सीरिया का यह गृहयुद्ध तीसरे साल तक आ पहुंचा है। राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थक हों या हथियारबंद विद्रोही, सभी एक-दूसरे पक्ष पर अत्याचार कर रहे हैं। हालांकि सभी पक्ष अपनी ओर से की गई हिंसा को यह कहकर जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं कि वे केवल अपनी मान्यताओं या विश्वास को बचाने की जंग लड़ रहे हैं। हत्याओं के इस खेल में अत्याचारी लोग खुद ही डिजिटल कैमरों, स्मार्टफोन्स की मदद से अपनी क्रूरता की वीडियो क्लिप बना रहे हैं या उन्हें तस्वीरों में कैद कर रहे हैं। लोगों को यातनाएं देते हुए, किसी की सरेआम हत्या करते हुए या अन्य बर्बर और निर्मम किस्म की घटनाओं को ये लोग इंटरनेट पर प्रचारित भी कर रहे हैं। इनकी प्रमाणिकता जांचना भी मुश्किल होता है। सीरिया के बाहर के फोटो पत्रकारों के लिए सीरियाई लड़ाकों के निर्मम कृत्यों को कैमरे में कैद करना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन अमेरिकी पत्रिका 'टाइम' को कुछ ऐसी तस्वीरें मिली हैं जो मानवता को शर्मसार करने वाली हैं।
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